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Ajab Desh Ki Ghazab Kahani: Suwaro Ko Chappan Bhog Aur Santo Ko Syahi

Article By: Munna
Editorial and opinion



अच्छे लोगो को तिकडम करके हटा दो या सूली पे चढ़ा दो. अच्छे लोगो को उनकी अच्छाई का सिला ऐसा ही मिला है अनादि काल से. इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि अरविन्द केजरीवाल पर कोई हाथ चला दे या बाबा रामदेव पे कोई स्याही फ़ेंक दे. ये स्याही बाबा के चरित्र के नहीं आपके दूषित अंत:करण की निशानी है.

स्वतंत्रता की लड़ाई आसान थी क्योकि दुश्मन का चेहरा पहचानना आसान था. आज लड़ाई कठिन है क्योकि दुश्मन दोस्त के भेष में है या अपनों के बीच कोई अपना सा है.


Submitted:Jan 15, 2012    Reads: 55    Comments: 0    Likes: 1   


swami ramdevji

एक तो इस देश में इस बात का रोना रोया जाता है कुछ अच्छा नहीं हो रहा है, या ये कि कुछ अच्छा होना चाहिए, या अच्छे लोग राजनीति में नहीं आ रहे है. साहब ये देश कुत्तो और सुअरों का हो गया है. इसीलिए हंसो की, गायो की या शेरो की कोई अहमियत नहीं रही गयी है.

एक बार सुअरों को प्रभु ने निमंत्रण दिया कि आओ स्वर्ग में रहो. सुअरों ने पूछा कि क्या वहा मैला खाने को मिलेगा? प्रभु ने कहा नहीं. तो सुअरों ने कहा तब तो धरती ही बेहतर है. कुछ ऐसा ही समय आजकल का है. अच्छो को हटा दो क्योकि वे आपके कुकर्म में बाधक है. गलत लोगो को राजगद्दी पर बिठा दो, उन्हें छप्पन भोग खिलाओ, उनका सम्मान करो. अच्छे लोगो को तिकडम करके हटा दो या सूली पे चढ़ा दो. अच्छे लोगो को उनकी अच्छाई का सिला ऐसा ही मिला है अनादि काल से. इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि अरविन्द केजरीवाल पर कोई हाथ चला दे या बाबा रामदेव पे कोई स्याही फ़ेंक दे. ये स्याही बाबा के चरित्र के नहीं आपके दूषित अंत:करण की निशानी है.

kejar

ये दौर राजनैतिक पतन के चरम को दर्शाता है. आरोपियों को सरकारें सरंक्षण देती है और जो गलत से लड़ रहे है उनके पीछे पूरी सरकारी मशीनरी पड़ जाती है. आपका पूरा इतिहास खंगाला जाएगा और एक मुद्दा खोजकर आपको जेल के सलाखों के पीछे भेज दिया जायगा. स्वतंत्रता की लड़ाई आसान थी क्योकि दुश्मन का चेहरा पहचानना आसान था. आज लड़ाई कठिन है क्योकि दुश्मन दोस्त के भेष में है या अपनों के बीच कोई अपना सा है. इसलिए ये दौर कठिन सा है. वैसे जब संतो का भी अपमान होने लगे तो समझिये बुराई अब ख़त्म ही है. मुझे तो सकारात्मक होने की लत है. आशा की किरण तो कृष्ण का यही वाक्य है कि बुराई को चाहे कितनी भी बड़ी ताकतों का समर्थन प्राप्त हो उसे अच्छाई पे सफलता तो मिलने से रही. जीतेगा तो सच ही. देर होने का मतलब तम के विजय के रूप में नहीं लेना चाहिए उसके समूचे विनाश के निशानी के रूप में लेना चाहिए.

अंत में एक आदर्श चुटकुला सुनिए. सलमान रुश्दी भारत आयेंगे. इससें मुसलमानों की भावनाए आहत होंगी. मतलब जहा है वही रहे तो कही के मुसलमानों की भावनाएं नहीं आहत होंगी.

krishna_scraps_3

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