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Bhroon Hatya Satyamev Jayate Ki Aamir Yani D K Bose Ke Dvara

Article By: Munna
Editorial and opinion



मुझे सिर्फ इतना ही कहना है कि कम से कम सतही लोग संवेदनशील मसलो से अपने को दूर रखे क्योकि उनकी नीयत पे यकीन करना बिल्कुल असंभव काम है. आमिर एक अच्छे अभिनेता है लिहाज़ा फिल्मो पे ध्यान दे. गंभीर विषयो पे विचार विमर्श करने के लिए अभी इस देश में विद्वानों का अकाल नहीं पढ़ा है जो हम डी के बोस टाइप के लोगो को गंभीरता से सुनने का प्रयास करे. ये काम मीडिया में फैले दलालनुमा पत्रकार करते रहे.


Submitted:May 9, 2012    Reads: 25    Comments: 0    Likes: 0   



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मै अगर कुछ कहता हूँ तो उसके आशय बहुत सारे निकल लिए जाते है. इसलिए मै कुछ कहने के बजाय अब तक मौन ही था इस सत्यमेव जयते तमाशे पर. अखरता बहुत है जब देखता हूँ भांड टाइप के लोगो को संवेदनशील विषयो पर बोलते हुए. उस पर भी ये और ज्यादा अखरता है कि जो मीडिया आलोचक की मुद्रा में आ जाता है जब कोई विशेषज्ञ इन विषयो पर अपनी राय प्रकट करता है आज इस सतही आयोजन को बहुत सराह रहा है गोया इसके पहले कभी किसी ने इन मुद्दों पर गौर ही ना किया हो?

मै अब भी कुछ नहीं कहता अगर मेरे पत्रकार मित्र आवेश तिवारीजी, एडिटर इन चीफ नेटवर्क सिक्स, के फेसबुक पेज पर मुझे ये शीबा असलम फहमी का लिखा हुआ सन्देश ना पढने को मिला होता. बिल्कुल ठीक प्रतिक्रिया दी है शीबा ने. मुझे सिर्फ इतना ही कहना है कि कम से कम सतही लोग संवेदनशील मसलो से अपने को दूर रखे क्योकि उनकी नीयत पे यकीन करना बिल्कुल असंभव काम है. आमिर एक अच्छे अभिनेता है लिहाज़ा फिल्मो पे ध्यान दे. गंभीर विषयो पे विचार विमर्श करने के लिए अभी इस देश में विद्वानों का अकाल नहींपड़ा है जो हम डी के बोस टाइप के लोगो को गंभीरता से सुनने का प्रयास करे. ये काम मीडिया में फैले दलालनुमा पत्रकार करते रहे.

शीबा असलम फहमी ने ये कहा:

” बोस डी के, आमिर!

ये वही आमिर खान हैं ना जिन्होंने अपनी एक फ़िल्म में कामयाबी का मसाला डालने के लिए महिला जननांग को दी जानेवाली भद्दी गाली पर एक गाना बनाया और उस गाने को फ़िल्म की पब्लिसिटी में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया था ? आमिर खान से मेरा सवाल है की कोई कैसे एक महिला का बाप या भई बनने की हिम्मत करे जब इसी कारण उसे गाली से नवाज़े जाने की संभावना बनती हो? आज वे 3 करोड़ प्रति एपिसोड की दर से नारी-चिंता में कामयाबी के झंडे गाड़ रहे हैं. महिलाओं के ज़रिये कामयाब होना है बस, ‘वैसे’ नहीं तो ‘ऐसे’! पहले गाली दे कर, अब गाली दी गई औरत पर ग्लीसरीन बहा कर! ताज्जुब ये की बड़े-बड़े पत्रकार और लेखक भी इस आमिर-गान में पीछे नहीं! बोस डी के, याद आया ! “

इस पर मधुकर पाण्डेय ने ये जोरदार टिप्पणी दी:

” अब मेरे ख्याल में इन्हें अगला एपिसोड उस विषय पर करना चाहिए जिसमें दो-दो तीन तीन बच्चे पैदा करने के बाद एक मर्द अपनी पत्नी को तलाक तलाक तलाक कह कर … उन्हें अंधेरों में भटकने को छोड़ देता है…. और किसी दूसरी औरत से शादी रचा लेता है…….

यह और कुछ नहीं बाजारवाद और राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं (राज्य सभा ) का एक खेल है…..जिसमें भोली जनता बेवकूफ बनायीं जा रही है पर अब लोग ज्यादा मूर्ख नहीं बन सकते…..क्या आमिर खान कश्मीर से पलायन को विवश हुए कश्मीरी पंडितों की समस्याओं को भी इसी शिद्दत से उठायेंगे…क्या वे गोधरा की ट्रेन में मारे गए उन ५० से अधिक मृतकों के घर जाकर हाल चाल पूछेंगे….? सब माया है…सब बाज़ार है…

Reference:

Satyamev Jayate

Dainik Bhaskar



Pic Credit:

Pic One





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