Welcome Visitor: Login to the siteJoin the site

Hamara Ganatantra: Ayyasho Aur Gundo Pe Tika Ek Bheedtantra

Article By: Munna
Editorial and opinion



हमारी भोली जनता जनार्दन फटी शर्ट में हाथ में मोबाईल लिए ये समझती है कि हम किसी सुनहरी दुनिया में प्रवेश करने वाले है भविष्य में। इस मृग मरीचिका में भारत वासी उलझे हुए है। क्रिकेट, लौंडिया, बेतहाशा पैसा कमाने का जूनून किसी भी कीमत पर ये हमारे देश के नेशनल पैशन है। लोगो को की इस बात से परवाह नहीं है कि उनकी चमचमाती गाड़ी गाली गलौज, खुले मैनहोल और गड्ढो में सडको पर चल रही है बढ़ी हुई पेट्रोल के कीमतों के साथ ही बढती रफ़्तार के साथ।


Submitted:Jan 24, 2013    Reads: 10    Comments: 1    Likes: 0   


कवि सुदामा पाण्डेय 'धूमिल': यहां, सिर्फ, वह आदमी, देश के करीब है जो या तो मूर्ख है....या फिर गरीब है

कवि सुदामा पाण्डेय ‘धूमिल’: यहां, सिर्फ, वह आदमी, देश के करीब है जो या तो मूर्ख है….या फिर गरीब है”


कहते तो है कि भारतीय गणतंत्र बड़ी उम्मीदें जगाता है विश्व के उन कोनो में जहाँ और सरकारें तमाम तरीको के विरोधाभासों में लिपटी हुई है। उनके लिए भारत में गणतंत्र का लोप एक खतरे के घंटी से कम नहीं है। खासकर जब चीन से तुलना की जाती है तो ये जरूर दर्शा दिया जाता है कि वह पे कितनी दमनकारी व्यवस्था है जहा लोगो पे जुर्म तो होते है, लोगो को सताया तो जाता है लेकिन सेंसरशिप की वजह से कुछ सामने नहीं आ पाता। पडोसी मुल्क पाकिस्तान में फैली अराजकता को देखे जो वैश्विक आतंकवाद का पालन पोषण करने वाला है तो अपना देश किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। तो क्या परिस्थितयां वाकई इस देश में इतनी सुधरी है? लगता तो नहीं है अगर हम सूक्ष्म निगाहों से देखे तो।

इसकी एक वजह ये है कि इस देश में सरकार जरूर आम लोगो के दम से बनती है लेकिन उसका आम लोगो के दुःख दर्द से इसका कोई सरोकार नहीं। एक दिखावटी लगाव जरूर है लेकिन वह मूलतः अपने को सत्ता में बनाये रखने भर का जुगाड़ भर है बस। ये कैसी बिडम्बना है कि जिस सरकार ने गरीबी हटाओ का लक्ष्य दिया उसी ने इमरजेंसी भी थोपी इस देश में। सारी संवैधानिक संस्थाओ को जानबूझकर कमजोर किया गया। ये उस सरकार के द्वारा किया गया जिसके नुमाइन्दे आज लोगो के सुरक्षा का दम भरते है। हमारी भोली जनता जनार्दन फटी शर्ट में हाथ में मोबाईल लिए ये समझती है कि हम किसी सुनहरी दुनिया में प्रवेश करने वाले है भविष्य में। इस मृग मरीचिका में भारत वासी उलझे हुए है। क्रिकेट, लौंडिया, बेतहाशा पैसा कमाने का जूनून किसी भी कीमत पर ये हमारे देश के नेशनल पैशन है। लोगो को की इस बात से परवाह नहीं है कि उनकी चमचमाती गाड़ी गाली गलौज, खुले मैनहोल और गड्ढो में सड़क पर चल रही है बढ़ी हुई पेट्रोल के कीमतों के साथ ही बढती रफ़्तार के साथ।

मार्कंडेय काटजू,भूतपूर्व सुप्रीम कोर्ट जज, लोगो को मूढ़ तो मानते है लेकिन ये जरूर दर्शा देते है कि साहब इस देश में असल शासन तो सिर्फ आम जनता का ही है। उनके हिसाब से यहाँ राजशाही नहीं प्रजातन्त्र है जहा हर अधिकारी जिसमे नेता और जज भी शामिल है आम आदमी का गुलाम भर है। ये नौकर है और आम आदमी उनका “मास्टर” है। जैसे काटजू साहब लोगो की क्षुद्र मानसिकता पर सवाल उठाते है उसी तरह मुझे भी समझ में नहीं आता कि इनके इतने हसीन इंटरप्रिटेशन को, इतने सिम्प्लिस्टिक अप्प्रोच को किस निगाहों से देखा जाए जहा पे किसी ख़ास पार्टी के गुंडे इसलिए पुलिस अधिकारी को अपनी जीप के पीछे लखनऊ के सडको पर घसीटते हुए ले गए थें कि उसने प्रतिरोध किया था उनके गलत तरीको का। या कोई अदना सा पुलिस का कांस्टेबल भी किसी प्रोफेसर को सडको पर माँ बहन की गालिया दे सकता है जरा सी बात पर। तो आम आदमी को क्या इज्ज़त मिलती होगी सरकारी चमचो से ये सहज ही सोचा जा सकता है। आप भी सोचे कि हमारा गणतंत्र कितना वास्तविक है जो मेरी नज़रो में अय्याशो और गुंडों पे टिका भीड़तंत्र है ।धूमिलकी ये पंक्तिया आज भी बहुत सटीक बैठती है:

“हर तरफ धुआं है
हर तरफ कुहासा है
जो दांतों और दलदलों का दलाल है
वही देशभक्त है

अंधकार में सुरक्षित होने का नाम है-
तटस्थता। यहां
कायरता के चेहरे पर
सबसे ज्यादा रक्त है।
जिसके पास थाली है
हर भूखा आदमी
उसके लिए, सबसे भद्दी
गाली है

हर तरफ कुआं है
हर तरफ खाईं है
यहां, सिर्फ, वह आदमी, देश के करीब है
जो या तो मूर्ख है
या फिर गरीब है”

जस्टिस काटजू: आम आदमी मास्टर है और सरकारी अफसर/नेता उसके ग़ुलाम है प्रजातंत्र/गणतंत्र में। कितना सही है वो वास्तविक धरातल पर?

जस्टिस काटजू: आम आदमी मास्टर है और सरकारी अफसर/नेता उसके ग़ुलाम है प्रजातंत्र/गणतंत्र में। कितना सही है वो वास्तविक धरातल पर?


Pics Credit:

Pic One

Pic Two





0

| Email this story Email this Article | Add to reading list



Reviews

About | News | Contact | Your Account | TheNextBigWriter | Self Publishing | Advertise

© 2013 TheNextBigWriter, LLC. All Rights Reserved. Terms under which this service is provided to you. Privacy Policy.