छोटू रेलवे स्टेशन पर एक चाय बेचने वाला लड़का है जिसका ना कोई नाम है, सिर्फ एक नाम जानने वाली पहचान है। जिसको सिर्फ छोटू कह कर ही पुकारा जाता है। एक दिन छोटू चाय बेच रहा था कि तभी नई उम्र का एक लड़का आता है और उससे चाय लेकर पीने लगता है। उसका नाम होता है फारूक कबीर और वो उससे चाय पीते-पीते उससे पूछता है-तुम्हारी उम्र क्या होगी। छोटू को अपनी उम्र के बारे में पता नहीं होता है उसे तो बस अपने काम के बारे में पता होता है। वो उससे उसके स्कूल के बारे में पूछता है।इस पर छोटू कहता है कि पढ़ने का तो मुझे बहुत षौक है और मेरे पास एक अंग्रेजी की किताब भी है और जैसे ही छोटू उसे अपनी किताब दिखाने जा रहा होता है तभी फारूक उससे कहता है कि चाय तो काफी अच्छी बना लेते हो।छोटू उसे थैंक्स कहता और साथ ही उसे ये भी बताता है कि ये चाय मैंने नहीं मेरी अम्मा ने बनाई है।तभी छोटू का ताउ आ जाता है और ये सब देखकर ताउ छोटू को थप्पड़ मारता है और कहता है कि मैंने मना किया था ना कि किसी अज़नबी से ज्यादा बात नहीं करनी, फिर उसका ताउ उसे काफी भला-बुरा कहने लगता है तभी ये सब देखकर फारूक को गुस्सा आ जाता है और जाकर ताउ को रोकता है।लेकिन उसका ताउ फारूक को साइड करके छोटू को लेकर चला जाता है। फिर अगले दिन फारूक फिरसे रेलवे स्टेशन जाता और वहाँ जाकर देखता है कि छोटू फिर से अपना काम कर रहा होता है,फारूक उसके पास जाता है और उससे चाय खरीदकर पीने लगता है साथ ही उससे पूछता है कि कल जो तुम्हारा ताउ आया था वो ऐसा क्यों है, तुम कुछ करते क्यों नहीं?छोटू कहता है मैं उससे कुछ नहीं कह सकता वो मुझसे बड़ा है और वो ही हमें पालता भी है।फारूक उससे फिरसे उसकी पढ़ाई के बारे में पूछने लगता है।तो छोटू कहता है कि मुझे तो काफी शौक है पर मैं कहाँ पढूं और कैसे पढूं ।किसी अच्छे स्कूल में दाखिला नहीं मिलता और ना ही मेरे पास इतने पैसे है।फारूक उसे भरोसा दिलाता है कि मैं तुम्हें पढाउंगा लेकिन शहर से वापिस आने के बाद,छोटू खुश होता है और उसे थैंक्स बोलकर चला जाता है। अगले दिन छोटू फिर से चाय बेचने रेलवे स्टेशन जाता है और फारूक का इन्तज़ार करने लगता है पर फारूक नहीं आता है।अगले दिन वह फिर से फारूक का इन्तज़ार करता है परन्तु वह आज भी नहीं आता है । छोटू फारूक का काफी दिनों तक इन्तज़ार करता है।परन्तु वह नहीं आता है, ऐसा करते-करते एक महीना बीत जाता है लेकिन फारूक का कुछ पता नहीं होता है।अब छोटू की उम्मीद़ टूट जाती है और फिर वो अपने ताउ के बताये रास्ते पर चल देता है अर्थात् चाय बेचना ही अपनी तक़दीर समझ लेता है। एक दिन काफी तेज बारिश हो रही होती है और छोटू बारिश से बचने के लिए रेलवे के वेटिंग रूम में चला जाता है।वहा पर टीवी चल रहा होता है।उसमें डा0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम भाषण दे रहे होते है, छोटू रूक कर उसे देखने लगता है।उसमें वो कहते है कि जब वो छोटे तो बहुत गरीब थे उनके पास पढ़ने के लिए भी पैसे नहीं थे इसलिए वो पढ़ने के लिए न्यूजपेपर बेचा करते थे।अंत मे उन्होने एक बात भी कही कि पढ़ने या किसी भी काम को,किसी के भरोसा पर मत छोडो जो भी करना है स्वंय ही करो।छोटू उसे काफी ध्यान से सुनता है और उसे अपनाने की सोच लेता है फिर वो इस बारे में अपने ताउ से बात करता है और कहता है कि मै भी पढ़ना चाहता है।इस पर ताउ उसे मारपीटकर सुला देता है।अब छोटू वहाँ से भाग कर शहर चला जाता है और चाय बेचकर पैसे कमाने लगता है फिर वो जाकर एक छोटे से स्कूल में दाखिला भी ले लेता है। धीरे-धीरे वह अच्छे स्कूल में भी दाखिला पाने मे कामयाब हो जाता है। एक दिन अचानक रास्ते में वह फारूक से मिल जाता है लेकिन छोटू उस से बात नहीं करता।फारूक उसे रोकता है और उससे माफ़ी मांगता है और कहता है कि मै जानता था कि तुम खुद पढ़ोगे।मै तो बस तुम्हारे अन्दर की प्रेरणा को बाहर लाना चाहता था।फिर उससे पूछता है कि तुम रह कहा रहे हो।छोटू उसे बताता है कि वह एक अमीर के रेस्टोरेंट में काम करता है।वहां चाय बनाता है और वही पर रहता भी है।फारूक उसे अपने घर ले जाने के लिए कहता है परन्तु छोटू उसे मना कर देता है और चला जाता है।फारूक जोर से चिल्लाकर पूछता है कि अपना नाम तो बताता जा,छोटू चिल्लाकर अपना नाम विष्णु बताकर चला जाता है।

(भारत में 30% बच्चे है जो चाइल्ड लेबर की तरह काम कर रहे है और वो किसी के भरोसे है कि कोई आये और उन्हें पढायें।पर नहीं उन्हे अपने आप ही कुछ कर के दुनिया को दिखना होगा।)