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A Changing Trend

By: praveen gola

Page 1, In today\'s world, everything is dramatically changing from old pattern to new. Satyug is becoming Kalyug, read Hindi poem on changing life and values

लेखक आज भी हैं ……बस लिखने की कलम बदल गयी ,
कल जो स्याही थी …….वो आज keyboard में बदल गयी ।

किताबें आज भी हैं ……बस उन्हें पढ़ने की तस्वीर बदल गयी ,
कल जो कागज़ पर होती थी …..वो आज Internet की e -book बन गयी ।

विद्यालय आज भी हैं ……बस उनमे सिखाने की शिक्षा बदल गयी ,
कल जहां सिर्फ विद्या थी …..वहीँ आज प्रतिस्पर्धा की होड़ लग गयी ।

परिवार आज भी हैं ……बस उन्हें निभाने की नियत बदल गयी ,
कल जहाँ ख़ुशी थी …….वो आज नफरत में बदल गयी ।

दोस्ती आज भी हैं ……बस दोस्तों की सूरत बदल गयी ,
कल जो महफ़िल की शान होती थी …..वो आज time -pass बन गयी ।

आशिकी आज भी हैं ……बस आशिकों की आशिकी बदल गयी ,
कल जो मोहब्बत थी …..वो आज Break -Up Party बन गयी ।

शादी आज भी हैं ……बस उस शादी की पहचान बदल गयी ,
कल जिसे निभाने की कसमें थी …….आज उस कसम में दौलत भी मिल गयी ।

पुजारी आज भी हैं ……बस पूजा करने की विधि बदल गयी ,
कल जहाँ भगवान् की मूरत थी ….. आज उस मंदिर में ही रंगशाला खुल गयी ।

मंत्री आज भी हैं ……बस उनकी सियासत बदल गयी ,
कल जो देश को संभाले थे ….. आज उसी देश की बोली लग गयी ।

औरत आज भी हैं ……बस उस औरत की छवि बदल गयी ,
कल जो देवी थी …….वो आज भोगने की वस्तु बन गयी ।

शहर आज भी हैं ……बस उन शहरों की हवा बदल गयी ,
कल जहाँ सभ्यता थी  ….. वो आज असभ्य लोगों की जागीर बन गयी ।

देश आज भी हैं ……बस उस देश की परिभाषा बदल गयी ,
कल जिसे “सोने की चिड़िया” कहते थे  ….. वो आज “घोटालों की दुनिया” बन गयी ।

युग आज भी हैं ……बस उस युग में काली छाया पड़ गयी ,
कल जो सतयुग था   …….वो आज कलयुग की कलुषित मूरत बन गयी ।

सब कुछ आज भी हैं ……बस उसे समझने -समझाने की होड़ लग गयी ,
कल सिर्फ कुछ थोड़े से लोग ज्ञानी थे …..  और आज मूर्खों को भी ज्ञानी की पद्वी मिल गयी ।

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