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An Intelligent Friend

By: praveen gola

Page 1, Read this Hindi poem on love in young age. In young age love, it is very possible to commit mistake in strong emotion. But true lover keeps control.

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

तुम अभी नादान हो ………नादानी न करो ,
मेरी दिल~ए ~बेताबी से यूँ ………बेईमानी न करो ।

मेरी मजबूरी का तुम ……यूँ इम्तिहान न लो ,
इस चढ़ती हुई जवानी को ……कोई नाम न दो ।

मैं रोक नहीं पायूँगा ……तुम्हारे लिए उठे जो बहते ज़ज्बात ,
मैं यूँ ही खो जायूँगा ……तुम्हारे साथ दिन और रात ।

 

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

 

“वो” कशमकश में इतना ……मजबूर हो चला था ,
एक तरफ हमारी ……..और दूसरी तरफ अपनी ………हर तस्वीर खो रहा था ।

ये उम्र का था ऐसा सैलाब ………जिसमे हर कोई बह जाएगा ,
मैं भी एक इंसान हूँ ……जो तेरे साथ बंध जाएगा ।

तुम जाओ इन रातों से दूर कहीं ……..मत बदनाम मुझको करो ,
मैं इस समय एक आग का शोला हूँ ………..मत हवा इसमें भरो ।

 

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

 

मैं भी तड़प रही थी इधर …….उसकी कही हर जुबानी से ,
मैं भी संभल रही थी……उसकी इस परेशानी से ।

कसूर न उसका था………न ही मेरा था उसके लिए पैगाम ,
ये अकेलेपन का था खामियाज़ा …….जो कर रहा था हम दोनों को परेशान ।

ना “वो ” मुझसे मिलता ………ना मैं उसके संग बहती ,
जो इश्क की गर्मी थी ……..वो शायद तब हमारे दरमियान ही रहती ।

 

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

 

एक बार को हम दोनों …….बस कर देते सच में नादानी ,
वो एक ऐसी थी कहानी …….जिसमे शब्दों की न थी जुबानी ।

“वो” बार-बार कह रहा था ……..”जाओ ……दूर मुझसे !!” ,
क्योंकि “वो” हर बार सह रहा था ……..लहरों की कशिश मुझसे ।

“वो” कह रहा था ……..मत समझो इश्क में अपनी ……कोई जीत या हार ,
फिर क्यों जिद पर अड़ी थी “मैं”……पाने को उसका प्यार ।

 

“वो” कह रहा था ……”जाओ” ……..नहीं तो बह जायोगे ,
मेरे साथ मचलती लहरों में ……….यूँही कहीं खो जायोगे ।

 

“उसकी” मजबूरी पर अब आने लगा था ……मुझे और भी ज्यादा प्यार ,
जो अपनी बेताबी में भी …..चाहता था मेरे हित में ही अपना संसार ।

यूँही बदनाम करता है अक्सर ……”लड़कों” को ये सारा संसार ,
ये सोच मैं चली गयी वहाँ से ……….क्योंकि उस वक़्त मेरा यार था दुनिया में ………सबसे ज्यादा समझदार ।।

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