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Click Of an Open Mouth

By: praveen gola

Page 1, This Hindi Poem is on bad effects of tobacco.Chewing tobacco and other forms of smokeless tobacco,Are more harmful and addictive than you might think.

खैनी, गुटखा, ज़र्दा, पान मसाला…
पैकेट खोल फट से मुँह में डाला ,
सस्ता सा “नशा” ….मगर होती है शान,
हाँ ,मैं भी रखता हूँ ….ऐब में अपना एक नाम ।

धीरे-धीरे उस एक रूपए के Pouch  ने ,
ऐसा रस घोला मेरे Mouth में ,
खाली-खाली सा कुछ लगता है ,
जब पैकेट से मुँह नहीं भरता है ।

एक अलग सी महक ….एक अलग सा सुकूँ ,
क्या हर्ज़ है इसमें …जो मैं इसको चबा लूं ?
लड़की,दारु का शौक नहीं मुझे ,
सिर्फ तम्बाकू की लत से ही तो दिन बुझे ।

अब जवानी की उम्र में भी ….गर कोई शौक न किया ,
तो क्या बुढ़ापे में चबायेंगे ….तम्बाकू की पुड़िया ?
इसी अदा पर तो मेरी ……वो नाज्नीने मरा करती हैं ,
जब दांतों तले पान -मसाले की …..महक से वो निखरती हैं ।

खैनी रगड़ कर जैसे ही ……..जुबां के नीचे रखता हूँ ,
त्यौहार मनाने का दुगना मज़ा ……….अपनी धमनियों में भरता  हूँ ,
“ज़र्दे” की डिबिया से ……..बढ़ती है मेरे कोट की शान ,
“पान -मसाला ” Serve करते ही …..पार्टी में हो जाती एक पहचान ।

लम्बे-लम्बे से कश ……जब “सिगरेट ” के जलते हैं ,
कॉलेज  की कैंटीन में …….लड़कियों के दिल मचलते हैं ,
वो रह-रह के ……धुओं के छल्ले उड़ाना ,
सिगरेट पीने का तरीका …अपने जूनियर्स को सिखाना ।

उम्र चौबीस की ….. जैसे ही मेरी आयी ,
मैं डॉक्टर के पास पहुंचा …. लेने दवाई ,
भूख लगना …… एकदम बंद सा हो गया था,
हर खाने का स्वाद …..बेस्वाद हो गया था ।

मुँह को खोला जब …….तो दाँत गल गए थे ,
जुबान पर तम्बाकू के ………निशान छप गए थे ,
गालों में बच रहा था …..सिर्फ कुछ चमड़ी का नज़ारा ,
माँ रो रही थी कि बचा लो इसे ……….ये मेरा “लाल” है प्यारा ।

“Oral Cancer ” का नाम ……जैसे ही डॉक्टर ने सुनाया ,
मेरे पैरों तले की धरती में ……मानो भूचाल आया ,
अभी तो इतने सपने …..बाकी थे मेरे ,
कैसे छूट गए अधूरे ……वो बिन पढ़े फेरे ।

क्यूँ  इस तम्बाकू को …..मैंने गले लगाया ?
अपनी ही कश्ती को ………पानी में डुबाया ,
जीवन जीने की चाह ……एक ओर तलबगार थी ,
दूसरी ओर मृत्यु …..मेरे सर पर सवार थी ।

तीन महीने बिस्तर पर …..मैं तिल -तिल कर मरता रहा ,
अपने अंतिम क्षणों में ……अपनी नासमझी की कीमत भरता रहा ,
बेज़ार पड़ा बिस्तर पर ……..बस यही एक लेख लिख पाया हूँ ,
“Oral Cancer” को मत दो दावत …..जिससे मैं अब तक न उभर पाया हूँ ।

बहुत से सपने टूट गए ……बहुत सी उम्मीदें बह गईं ,
परिवार के लिए न कर सका कुछ ……उसकी सूनी माँग भी भरने से रह गयी ,
जलाओ जब भी मुझे तुम ……..शमशान में ले जाकर ,
एक तस्वीर खींच लेना …..मेरे खुले हुए मुँह की ….जनता को दिखाकर ।।

A Message To All-

Chewing tobacco and other forms of smokeless tobacco

Are more harmful and addictive than you might think.

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