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Inner voice of an Indian JAWAAN

By: praveen gola

Page 1, Hindi poem highlighting voice of Indian soldier. Soldier dies for the country and becomes martyr. He will take birth to sacrifice himself again.

कुछ पलों के लिए “वो” मेरी …….”शहादत” पे रोने आया ,
मुझे “शहीद ” कह ……ख़बरों में अपना “नाम” संजोने आया ।

कभी लड़ता जो मेरी जगह ……”वो” खुद मैदान~ए ~जंग में ,
सीने को आगे तान कर ……”देशप्रेम” को लिए तरंग में ।

तो सोचता महत्व …..एक जवान के गौरव का “वो “,
कि “शाहदत ” किसको कहते हैं ……शहीदों की शान को ।

मैं हँस -हँस कर भरता हर ज़ख़्म …..जो मिला था मुझे …..बेख़ौफ़ यूँ ,
सीमा की रक्षा के लिए ……बना था मैं “जवान” ज्यों ।

उन पापियों ने …..छल से किया ,छलनी मेरा “सर” कलम ,
फिर भी न देखो ….दिख सकी …..चेहरे पे मेरे कोई शिकन ।

बिना  “सर” के ….मेरे तन को ….मेरे देश को सौंपा गया ,
“वो ” लेकर चले आये मुझे …..बाँध तिरंगे का “कफ़न” ।

हज़ारों निन्दायें हुईं …..कि अब कहेंगे “उनसे “…….ये ज़ुल्मों सितम ,
कुछ दिनों के बाद देखो ……सब भूल गए अपना “वतन ” ।

ये एक चिंगारी थी ……जो फेंकी थी “उस” जल्लाद ने ,
ये कल हवा बनेगी ……जो न रोकी यहीं “सैलाब ” में ।

“वो ”  वोट लेने की खातिर ……..बन गया उनका फिर से “हमदर्द ” ,
“मर्द” की परिभाषा में …….सबसे बड़ा है “वो ” नामर्द ।

मेरी  “शहादत” पे रोने के लिए …….नामर्दों की कोई औकात नहीं ,
मैं आज भी मर्द हूँ ……जिसकी रूह में बस साँस नहीं ।

मैं फिर जनम लूँगा एक और …..अपने छल को छलने के लिए ,
तू मेरे लिए दो आँसू ना गिरा ……”देशप्रेम” का रंग भरने के लिए ।

गर इस तरह “शहीदों ” को …….”शहीद ” बना तू “फूल ” चढ़ाएगा ,
तो याद रख ……आने वाला हर “शहीद “………..तुझे तेरे मुरझाये फूल लौटाएगा ।।

My Tribute For JAWAANS-

शहीदों की शहादत को …..करते हुए सलाम ,
कायरों की कायरता का ……करते हुए बखान ,
एक नागरिक से पूछो ……..उसके देश के लिए सम्मान ,
जो छिप कर वार करे ……उसके लिए हर शब्द क़त्ल~ए ~आम ।।

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