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Kanyadaan-Hindu mythology issue

By: praveen gola

Page 1, according to the Hindus marriage once the daughter married then she has no right on its father place as she is being treated to be donated to someone else.

Hindi Poem – Kanyadaan ["कन्यादान" नहीं -- कहो "कन्या सम्मान"]

Kanyadaan – Hindi Poem

“कन्यादान’– “महादान” ….
कहते हैं- ज्ञानी-विद्वान ,
कर दो पीले, बेटी के हाथ ,
पूरे हो मन के, सब अरमान |

“गंगाजी” में नहाकर आयो …
अपने मन में ख़ुशी मनाओ ,
पाल-पोस कर बड़ा किया था,
सौंप दिया अब दूजे धाम |

बाप की किस्मत, फिर से चमकी…
माँ की भी,सरदर्दी छूटी….
बेटी चली गयी ससुराल …
रहना पड़ेगा अब, वंही हर-हाल |

बेटी के मन को,जान सका न कोई ….
नए घर में बेचारी, बनाकर रसोई ….
जब थक कर याद करती ,अपने माँ-बाप को …
तो दुःख-सुख बांटने वाला भी ,मिला न कोई |

धीरे-धीरे रंग बदलते …
ससुराल वालों के तेवर बिगड़ते ,
बात-बात में ताने कसते ,
जा सकती हो वापस, अपने घर के रस्ते |

जब बात उससे ,सही न गयी ,
तो मन में ठानी ,कि अब हो गयी अति …
बाँध कर अपना बोरिया-बिस्तर ,
लौट चली बाबुल कि गली |

घर कि चोखट पर,जाकर देखा…
पापा के गुस्से को, आते देखा…
माँ कि भी थी ,कुछ व्यथा निराली …
की क्यों लौट आयी ,फिर से बेटी हमारी ?

उसके दर्द को किसी ने, न जाना …
बस देने लगे सब,उसको ताना ….
कि बचपन से ही, उसे आता है न निभाना ….
आज हो गया पूरा,ये भी सपना पुराना |

तुमसे हमें अब, कोई “मोह” नहीं है ….
“कन्यादान” किया है तुम्हारा ….
“दान” का मतलब, समझो जरा तुम….
जिसे देकर न बचता है, कोई रिश्ता हमारा |

सुनते ही वो , अवाक रह गयी ….
“बेटी’ तो छोड़ो ,”वस्तु” बनकर सिर्फ रह गयी ,
झूठा हो गया आज सारा ,वेड-पुडान हमारा….
जो “कन्या’ को “वस्तु ‘ बनाकर रखता है ,तमाम उम्र सारा |

दान किया माँ-बाप ने, तो “वस्तु” बना दिया ,
कहते थे जिसे “कन्या’,उसका “दान” करा दिया….
गर पहले पता होता कि ,ये शादी नहीं “दान” है मेरा ,
तो रह लेती वंही, जहाँ पर हो रहा था “अपमान” मेरा |

पर इतना जरूर कहूँगी इन् समाज के ठेकेदारों से …..
कि शादी के धारणाये बदलो, अब बदलते हुए विचारो से …
गर कहते हो कि -करते हो सच्चा प्यार ,अपनी “कन्या” से …..
तो “कन्यादान” न देकर ,”कन्या सम्मान ” करो अपने उज्जवल हाथों से ||

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