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Tags: Breast, Cancer


A short Hindi poem which reflects the issue of Breast cancer in women and advice them that Self Examination is the only way to get rid of this Disease ,And If Symptoms Persists.....Then Go For "Mammogram" at least.


Submitted:Feb 14, 2013    Reads: 7    Comments: 0    Likes: 0   


Save Womanliness

sad-one-eye-woman

कल तक था "उसे" भी गुमान …..हर स्त्री की भाँति ,
अपने सुडौल वक्षों को ……जब भी किसी महफ़िल में "वो" दिखाती ।

नारी की सुन्दरता का …..एक यही तो होता है ……सबसे उतम बखान ,
जब नाक-नक्शे और रंग-रूप के बाद …..वक्षों को मिलता दूजा स्थान ।

मगर कुछ समय बाद ही ……उसके वक्ष में …….एक गाँठ बनने लगी ,
वो उसे नज़रअंदाज़ कर ……..अपने भीतर पल रहे संकोच …..में ही मरने लगी ।

इतनी लज्जा भी स्त्री में …..होती है किस काम की ?
जब वो कह भी न सके ……अपने मन में दबी हुई व्यथा …….समझ उसे अपमान की ।

घंटों शीशे के आगे खड़े …….."वो" रोज़ अपने वक्ष को निहारकर ,
फिर सोच में पड़ जाती यूँही ……..कि किससे कहूँ ……ये किस्सा उघाड़कर ?

पति "परमेश्वर" से होता उसे संकोच ……..अपना दुःख-दर्द कहने में ,
कि कहीं छोड़ न बैठे पति उसका …….भंवर में फँसी उन लहरों में ।

फिर एक दिन अचानक ….."वो" अपनी "सास" के साथ अस्पताल गई ,
वहाँ "डाक्टरनी" को उसकी "सास" ने ……."उसकी" व्यथा की कथा कही ।

सुनकर "डॉक्टर" हैरान हो गई ……..तुरंत जाँच के लिए "उसे" बुलाया ,
परन्तु जब तक देर हो चुकी थी …….गाँठ बन गई थी तब तक ……"कैंसर" की छाया ।

"स्तन" कैंसर है बहुत विषैला ……..जो हर लेता सुन्दरता नारी की ,
उससे उबर न सका है कोई ……जिसे झेलनी पड़ी है मार ……इस बीमारी की ।

बहुत दर्द उसने भी सहा ……जब जुदा उसके "स्तन" को करना पड़ा ,
जिस सुन्दरता का कायल कभी जग था ………आज उसकी ही बदसूरती से गुजरना पडा ।

मगर साहस और त्याग से ही ……..नारी की पहचान है ,
वो फिर भी जिंदा रह कर जी ली ……यही उसके "स्त्रीत्व" की शान है ।

"ब्लाउज" में लगाकर "कपड़ा"…….वो समाज में अपना "स्त्रीत्व" छिपाती ,
मगर कहने वाले तो तब भी उसको ……..कह जाते "दिया बिन बाती" ।

कुछ सालों के बाद फिर से …….उसकी हालत और बिगड़ने लगी ,
एक के बाद अब दूसरे "स्तन" की …….उम्र भी देखो घटने लगी ।

"कैंसर" की फैलीं जड़ें अब ……..धीरे-धीरे से शिकंजा कसने लगीं ,
हाँ ,फिर से गुज़रना पड़ेगा उसी दौर से …….ये सोच उसकी उम्र भी घटने लगी ।

कोई और चारा बाकी न रहा अब …….दूसरे "स्तन" से भी निजात पाने को ,
"वो" फिर आ बैठी उस अस्पताल में दुबारा ………अपना "तन" चिरवाने को ।

हटा दिया दूजा "वक्ष" भी उसका ……उसके सुन्दर सीने से ,
"नारी" से बन गयी "वो' …."मर्द" अब …..बचा न शेष कुछ जीने में ।

आज भी महफिलों में जाना पड़ता है …….जब भी "उसे" …..कहीं "बाहर" ,
तब याद आते हैं "उसे" भी वो पल ……..जब वक्षों में डूबा करता था "उसके" भी ……यूँही सारा संसार ।

मगर आज "वो" उन वक्षों के बदले …….अपने बुझे हुए अरमान छिपाती है ,
पहनावा "स्त्री" का होता है ……मगर ब्लाउज में "कपडों" के वक्ष लगाती है ।

इतनी हृदय विदारक घटना ………न घटे किसी भी "स्त्री" के साथ ,
इसलिए पहले से ही सचेत रहो …….ये सन्देश देती है "वो" सबको एक साथ ।

कि जब भी कभी अपने "स्तनों" में …….कुछ अजीब सा महसूस करो ,
तो तुरंत डॉक्टरी जाँच करायो ………देर करने की मत भूल करो ।

नारी का सम्मान है उसके ………रूप और रंग से महान ,
इसलिए अपना "स्त्रीत्व" बचाओ …….जब भी खतरे में लगे अपने प्राण ।।

A Message To All Women-

Self Examination is the only way to get rid of this Disease ,

And If Symptoms Persists…..Then Go For "Mammogram" at least.





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