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Suhaagraat

By: praveen gola

Page 1, Hindi poem on painful experience of a bride on her first night. She had big dream of her first night full of love but it turned to be limited to lust.

“सुहागरात” मनाने आये थे वो …..
“सुहागरात” मनाकर चले गए ,
मेरी गरिमा पर अपने पुरुषार्थ का ,
रंग चढ़ा कर चले गए ।

मैं भोली निपट अभागन सी ,
जब तक इसका अर्थ समझती ,
तब तक वो अपनी कामुकता की ,
एक तस्वीर दिखाकर चले गए ।

जिस रात को मैंने सपनो में देख ,
एक झिल-मिल छवि बनायी थी ,
उस रात को वो अपनी जुबानी से ,
दो शब्दों में समझाकर चले गए ।

मेरे कितने अधूरे सवालों को ,
जवाबों की एक आस थी ,
उन सभी सवालों पर वो ,
एक सवालिया निशान लगाकर चले गए ।

सखियों ने अब तक समझायी थी ,
जो रात “सुहाग” की बेला की ,
ऐसी झूठी रात की वो एक …..
मज़ार सज़ा कर चले गए ।

कैसे पूछूँ ……किससे पूछूँ ,
उस रात की अदभुत कहानी मैं ?
मुझे उस रात की कहानी का वो ,
बस एक शीर्षक बताकर चले गए ।

सालों बीते ……सदियाँ बीतीं ,
कितनी रातों की घड़ियाँ बीतीं ?
हर रात में आकर वो अपने सिर्फ ….
अरमान बुझाकर चले गए ।

ना मैंने कुछ उनको कहा …
ना उन्होंने कुछ मुझको बतलाया ,
बस उस रात की चम-चम बेला में …
वो सितार बजाकर चले गए ।

मैं अपने सवालों को साथ लिए ,
अंतर्मन के द्वन्दों से झूझ रही ,
वो हर उठने वाले द्वन्द को ….
एक नया द्वन्द बनाकर चले गए ।

मुझे उस रात की चाहत जब-जब हुई ,
मैं तन्हाई में उसको समझती रही ,
पर उस रात को वो इतनी निर्दयी ….
और संगीन बनाकर चले गए ।

एक सखी ने मेरी मुझको बतलाया ,
उस रात का अर्थ होता है एक माया ,
वो उस माया रुपी रात में मुझको ,
अपना वजूद बताकर चले गए ।

मैं आज भी उनसे सुनने को …..
उस रात की मीठी बातें बैठी हूँ ,
वो आज भी मुझसे उन बातों को ….
ना करने की … एक कसम ठान कर चले गए ।

“सुहागरात” का अर्थ नहीं होता ….
सिर्फ कोरी निपट आलिंगन की छाया ,
अपनी संगिनी को समझो ऐसे उस क्षण में ,
कि वो जीवन भर याद करे उन पलों की माया ।

कोई आज भी पूछता है मुझसे …
अर्थ उस अनोखी रात का जब भी ,
मैं कहती हूँ कि वो रात थी ऐसी ,
जिसमे वो नए जीवन की ….एक सीख बताकर चले गए ।

“सुहागरात” शब्द बन गया है …..
सिर्फ किताबों का अब एक सवाल ,
जिसके हर जवाब में पुरुष …..
एक Official Sez  बिछा कर चले गए ।

वो पहले वाली रातें जिनमे कभी ….
हज़ारों बातें होती थी ,
उन सारी बातों को अब केवल ,
एक हवस का नाम बनाकर चले गए ।

“सुहागरात” मनाने आये थे वो …..
“सुहागरात” मनाकर चले गए ||

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