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Think before Migration

By: praveen gola

Page 1, Migration from Towns to cities is not a profitable one for An illiterate Person,As in Towns He is alone to die but in Cities he will responsible for Others too to Die.

शहरों की ओर भागते ……ये “देहाती” मेहमान ,
कुछ वर्षों में ही भर देते हैं …..यहाँ की शमशान ।

जिस रोज़ी -रोटी को पाने की खातिर ,उन्होंने किया था पलायन ……
उसी की आग में झुलस गए ,न जाने कितने निर्दोष तन ?

ये यू .पी ,बिहार ,गढ़वाल का रेला ……
बसता ही चला गया ,हर कोने में अकेला ।

शहरी चमक ने उसे …..कर दिया इतना पागल ,
कि भूखे पेट भी सोना मंजूर ,ओढ़े आकाश और बादल ।

काम करना कोई सीखा नहीं ,बन बैठे अब Driver….
‘Traffic Rules” का पता नहीं ,सरपट दौड़ाते Four Wheeler .

न खुद की जान प्यारी,न औरों के घर का ख़याल ….
रोज़ बिखेरते हैं सड़क पर ,खून से भरी होली का गुलाल ।

जब नौकरी से हाथ धो बैठे ,तो करने लगे कुकर्म …..
लूट-पाट से पेट अपना भर ,उड़ाया मासूमों को कफ़न ।

जाने की “शहर ” से सोचेंगे ,अब कभी भी नहीं …..
शहर तो शहर है ……..ऐसी सोच उनके मन में घर करी ।

खुद सलाखों के हैं पीछे ,परिवार उनका मर रहा …..
धीरे -धीरे देखो फिर से ,उनकी अर्थियों का नंबर बढ़ रहा ।

क्या मिला …. सोचो ज़रा ,यूँ शहरों में अपनी संख्या बढ़ाकर ?
गर सोचा होता “महंगाई” का पहले, तो कभी न आते यूँ गाँव छोड़कर ।

गाँवों में भी बसते हैं ,सच्चे दिल के इंसान ….
फिर क्यों चले आते हैं हम शहरों में ….. बनके  “बिन बुलाये” मेहमान ?

राज्यों की सरकार यदि चाहे ,तो इस पलायनता को रोक सकती है ……
शहर में हो रही गुंडागर्दी और भीड़ पर ,Control कर सकती है ।

गाँवों के निवासियों को “पलायनता” से पहले, यदि सचेत किया जाएगा …..
तो वो अपने साथ …. न जाने कितने परिवारों को,मरने से बचा पायेगा।

A Message To Them-

Migration from Towns to cities is not a profitable one for An illiterate Person,

As in Towns He is alone to die but in Cities he will responsible for Others too to Die.

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