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Truth Always Wins

Poetry By: praveen gola
Literary fiction



This Hindi poem highlights the value to speak the truth for young generation. Parents should encourage their children to value truth in their life.


Submitted:Jul 3, 2013    Reads: 4    Comments: 0    Likes: 0   


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Hindi Poem - Truth Always Wins

कल रात मेरा बारह वर्षीय मासूम सा "बेटा" …."झूठ" की दीवार बना रहा ,
मेरे पूछे गए हर सवाल को ……एक नए "झूठ" से छुपा रहा ।

मुझे दुःख उसके द्वारा किये गए नुकसान का नहीं …..बल्कि उसके "झूठ" बोलने का था ,
जिसे अपने ज़हन में बसा ….वो धीरे-धीरे उसका आदी हो चला था ।

इतनी कम उम्र में अगर …..वो इस तरह से "झूठ" को अपनाएगा ,
तो क्या होगा नहीं पता मुझे …..जब वो हमारी तरह व्यसक बन इठलाएगा ।

मैंने गुस्से में उसे लगा तो दिए …….थप्पड़ दो और चार ,
पर मेरे पूछने पर उसने यही कहा ……कि "माँ" झूठ बोलना ही है ……आजकल का सबसे बड़ा कारोबार ।

पता नहीं आप किस भरम में ….अब तक जी रही हो ?
जो लोगों को "सच" बोलने की ……नयी सीख दे रही हो ।

ये कलयुग है "माँ" ….यहाँ "सच" बोलने वालों की ……नहीं सुनता कोई पुकार ,
क्योंकि "झूठ" बोलना ही होता है …..यहाँ पर जनम सिद्ध अधिकार ।

सुनकर उसके मुँह से ऐसे वचन ……मैं अपने अंतर्मन को कहीं धिक्कार रही ,
कि क्या हो गया है इस युवा पीढ़ी को ……जो पैदा होते ही ……"झूठ" के अक्षर अपनी "किताब" में निहार रही ।

हाँ ,ये सच है कि ….सच और झूठ दोनों का ही …..होता है एक अटूट नाता ,
परन्तु "झूठ" उतना ही बोलो …..जितना आटे में नमक है सुहाता ।

अगर आटे में नमक ज्यादा मिलाकर …….रोटी को पकायोगे ,
तो एक दिन बेस्वादी से भरी रोटी ही …….इस जिंदगी में खायोगे ।

"झूठ" युधिष्ठर ने भी बोला था कभी ……किसी के प्राण बचाने की खातिर ,
यही उपदेश "गीता" में भी लिखा है …..कि "झूठ" बोलने वाला भी होता है ….कहीं न कहीं शातिर ।

मैंने उसे यही समझाया ……..कि "झूठ" बोलना कोई अपराध नहीं ,
मगर बात-बात पर "झूठ" से ……भवन का निर्माण करना ……भी कोई अच्छी बात नहीं ।

यही सीख देती हूँ मैं …..आजकल की इस नयी युवा पीढ़ी को ,
कि "सच" को अपने ज़हन में लायो …….गर चाहते हो पाना अपनी एक "पहचान"……चढ़ने नयी सीढ़ी को ।

याद रखो …."सच" बोलने वाला ही होता है ……जीवन में शत प्रतिशत कामयाब ,
"झूठ" बोलने वाला जीत भी जाए गर इस सामाजिक जंग को …..तब भी उसके सीने में सुलगती रहती है ….कहीं न कहीं एक "आग"॥





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