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A Metro Train Molestation

Short story By: praveen gola
Literary fiction



An Appeal To Govt- Ladies Compartment Must be enclosed with a Door in the late night hours as this story is based on a true Incident.


Submitted:Feb 18, 2013    Reads: 17    Comments: 0    Likes: 0   


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Molestation की कोई उम्र नहीं ……कोई जगह नहीं । स्त्री तो शायद बनी ही है किसी की भूख को शांत करने के लिए । यही निष्कर्ष मैंने भी निकाला …..जब उस दिन अपने सामने हुए हादसे को प्रत्यक्ष देखा ।

Delhi ……..जी हाँ वही Delhi …….जहां औरतों की सुरक्षा को लेकर आये दिन सवालिया निशान लगे रहते हैं । जहां की CM ने Metro Train में Ladies के लिए Specially First Cart Reserved किया है ताकि वो अपनी यात्रा के दौरान सुरक्षित रह सकें ।सुरक्षित ………अजीब सा ही लगता है अब ये शब्द भी सुनने में ।Compartment Ladies जरूर है ………पर ऐसा नहीं कि  उसमे आदमी आ ही नहीं सकते । शाम के 7 बजे के बाद वहाँ कोई भेद-भाव नहीं रहता ।उस समय कोई रोकने वाला Security Guard तो होता नहीं इसलिए Metro Train में सरे आम गुंडागर्दी होती है । कौन कब तक आवाज़ उठाएगा ………यही सोचकर बेचारी महिलाएँ चुप-चाप से अपनी CM को धन्यवाद करती रहती हैं ।

अभी कुछ दिन पहले की ही बात है …..तकरीबन शाम के 8 बजे थे और रोज़ की तरह मैं ऑफिस से घर लौट रही थी ।उसी Ladies Compartment में …..जहां पर किसी दरवाज़े से कोई भी अलगाव नहीं …..वहीँ पर एक 70 साल की बुढ़िया ……जिसको आँखों से भी कम नज़र आता था ……अपने सफ़र को तय कर रही थी । रात में वैसे भी Train में लोग कम हो जाते हैं ……इसलिए मेरे साथ सिर्फ 4-5 महिलाएँ ही थीं ।अचानक से मुझे बहुत तेज़-तेज़ से लाठी पीटने की आवाज़ सुनाई दी ।देखा तो तकरीबन कोई 25 साल का नवयुवक उस बुढ़िया को बुरी तरह से Molest कर रहा था ।वह बुढ़िया पहले तो यही समझती रही कि शायद Ladies Cart में कोई छोटी लड़की है जो उसे तंग कर रही है पर जब उसे किसी मर्द का हाथ अपने बदन पर महसूस हुआ तब वह अपनी लाठी से उसे टटोलने लगी ।

बुरी तरह शराब के नशे में धुत उस लड़के ने अपनी माँ से भी बड़ी उम्र की औरत को अपने वहशीपन के लिए चुना ।सभी महिलाएँ खामोश सी स्तब्ध होकर इस नज़ारे को देखने लगी ।तभी उनमे से एक महिला ने शोर मचाकर उसे डांटा तो वो दूसरे डब्बे में भाग गया ।थोड़ी देर बाद वह बुढ़िया किसी की मदद से अपने स्टेशन पर उतर गयी । और उसके उतरने के थोड़ी देर बाद ही वह लड़का फिर से वहाँ आकर और भी निडरता से बैठ गया और उस महिला को जिसने उसे डांटा था …..अपनी निगाहों से घूर-घूर कर डराने लगा ।

हम सभी असहाय से उसके मनोभावों को पढ़ते रहे और यही सोचते रहे कि वाकई में औरत बनी ही है शायद तिरस्कार के लिए । उसकी उम्र चाहे जो भी हो ………अगर वो अकेली है ………तो सबकी सहेली है ।

An Appeal To Govt-

Ladies Compartment Must be enclosed with a Door in the late night hours as this story is based on a true Incident .





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