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Mil gayee faansee "Kasab" Ko

By: praveen gola

Page 1, This poem is dedicated to the \"aatankvaad\" and appeal for the citizens to fight upto the end of it.

मिल गयी फाँसी "Kasab " को ,
एक और सबक मिला आतंकवाद को,
आज श्रद्धांजलि नसीब हुई ,
उन हजारों मायों के लाल को ।

सोचा था आतंकियों ने ,,,,
कि डर जायेंगें हम उनसे ,
नसीहत लो अब तो ज़रा कि ....
यही हश्र होगा उनका भी फिर से ।

दुःख हुआ सुनकर एक बार ,
कि  क्यों पहुंचा डाला उसे यूँ मौत के द्वार ?
ये था दर्द एक इंसान का दूसरे इंसान के लिए,
मगर उसने नहीं सोचा था जब बन गया था वो हैवान हमारे लिए ।

कितने लोगों को उसने .....
इतनी निर्ममता से मार डाला ,
मगर फिर भी "Human Rights " वाले कहते हैं ,
कि हमने मानवाधिकार छीन  डाला ।

राष्ट्रपति ने भी ठुकरा दी याचिका उसकी,
ये है सबसे बड़ी हार आतंकियों की।
पता है कि बुन रहे हैं नया ताना-बना वो फिर से,
पर उनको मात देने को तैयार खड़े हैं सेनानी फिर से ।

शब्द आखिरी वो भी यही बोला ......
कि माफ़ करे उसे अल्लाह -मौला,
ऐसी गलती दुबारा न होगी .........
सीख जिहादी ये है कर्मों का चोला ।

मकसद नहीं हमारा किसी देश की छवि को धूमिल करना ,
पर जवाब मिलेगा उनको भी गर भेजेंगे वो काँटों का बिछौना ।
आतंकवाद की आड़ में छिपकर कोई मकसद अपना साध रहा है .....
"कसब" जैसे भोले-भालों को आगे करके तीर निशाने पर साध रहा है ।

"kasab" जैसे हर आतंकी के फंदे बने हुए हैं जेलों में,
माँ का दूध पिया है तो आयो खेलो इससे यूँ मेलों में ।
सबसे बड़ा त्यौहार आज है पूरे "हिंदुस्तान " में,
फक्र हमें है कि  "Kasab" दफन हुआ देखो कब्रिस्तान में।

आज फिर से आतंक को देश का जवाब मिला,
26/11 के बदले 21/11 उनकी किताब में छपा मिला ।
जिहाद के नाम पर आतंक को गर वो बढाएंगे.....
तो मुल्क के बदले हम भी कफन उन्हें उड़ायेंगे ।

बहुत से जिहादी खड़े हैं बनने को फिर से " Kasab",
पर याद रखो हर बार मिलेगा उन्हें यूँही करारा जवाब ।
ये आतंकवाद जितना बढेगा उतना बहस का मुद्दा बनेगा,
तो फिर आयो चलो इस बहस को दें फिर से एक अंजाम ,
"Kasab" मरा है, "Kasab" मरेगा ,ऐसी सोच का करें सम्मान ।।

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