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My "Caste"

Poetry By: praveen gola
Other


Tags: Castism, Issue


There are Many persons of various castes who wants to hide their identity and pretend themselves that they belong to some higher castes.So its a lesson for them not to do the same and face the truth of what they are.


Submitted:Nov 12, 2012    Reads: 12    Comments: 0    Likes: 1   


कोई पूछे जो मुझसे, मेरी "जात" क्या?
में कहती हूँ कि- मैं "कुम्हार" हूँ ।
इस जात-पात की भाषा में देखो ...
अब तक कितनी नादान हूँ ।।

लोग कहते हैं कि - ये क्या किया?
इस तरह अपनी "जात" बताने का घोर पाप किया,
अब न कोई तुम्हे अपने साथ बिठाएगा ..
और न ही "सोसाइटी"में तुम्हारा अस्तित्व ही रह पायेगा ।

दुनिया वालों की सोच को सुनकर मैं परेशान हूँ ,
वो क्या जाने महिमा "कुम्हार" की?
जो रंग-रूप भरता कच्ची माटी में ....
आज उसके ही रूप को छिपाने का पाप हम क्यूँ करें?

धीरे-धीरे अगर इस तरह, अपनी "जात " को हम छिपाएंगे...
तो बहुत जल्द ही "टाइगर" की तरह "extinct category" में हो जायेंगे ।
क्यूँ झूठ कहें दुनिया वालों से अपनी 'जात" को लेकर ?
क्या ये अच्छा नहीं की जग में "मिसाल" बनें ,अपनी नयी सोच को रखकर ?

कबीर की वाणी भी क्या याद नहीं है- बोलो?
कि- "जात -पात पूछे नहीं कोई ,हरि भजे सो हरि का होई",
छुपाता वो है, जिसके "वजूद" का कोई डर हो .....
बिना "वजूद" के पहचान,क्या अच्छी लगेगी तुमको ?

गर आज भी न कह पायोगे ,अपने "surname" को सबसे.......
तो क्या मिला हमको ,इतनी शिक्षा प्राप्त करके?
हाँ मैं इस "caste" का हूँ - कहने का दम रखो कसकर ,
ताकि "confidence level " बड़े,आने वाली "generation" में भी हँसकर ।

एक झूठ बोलकर ..... तुम कब तक रह पयोगे?
भरी महफ़िल से बेइज्जत होकर,एक दिन निकाले जायोगे ।
तब लोग ये कहेंगे कि -झूठा था उस "caste " का बंदा,
जिसने खुद की हस्ती मिटाने की खातिर ,बदनाम किया पूरी जात का "funda"।

हम सब "ईश्वर " के बनाये हुए इंसान हैं ,
बस खुद के बनाये हुए नियमों को, बांधे हुए परेशान हैं ।
बहुत सी धारणा रखने वाले लोग,यहाँ जन्म लेते हैं ....
पर जिस जात या धर्म में हम पैदा हुए हैं , उसको कहने का जज्बा ....बहुत कम अपने सर पर लेते हैं।

आज भी "'जातिवाद " है फैला हुआ समाज में ,अपने ज़ोरों पर......
गर ख़त्म न इसे किया गया...तो फिर से ये देश बनेगा "गुलाम"......अंग्रेजों के कोड़ों " पर ।
डर नहीं है जिसको अपनी "जात" या "धर्म" बताने का....
सच्चा "देशभक्त" और "नागरिक" वही है ,किसी से आँख मिलाने का ।

हाँ हम खुलकर कहेंगे आज कि ..... ये है हमारी "जात",
ये है हमारा "धर्म" और ये है हमारा "ईमान "।
करोड़ झूठों से बेहतर है ,नयी सोच और सम्मान .....
और जिसने छिपाया इसको ....उसका आज ही नहीं ,हर जन्म में होगा अपमान ।।





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