A Sample Ghazal from ‘Valentine Ghazals’ by Saba Hilal
साथ ज़माना होता
काश दस्तूर-ऐ-वफ़ा हमको न निभाना होता
छूट जाता कोई ग़म जो पुराना होता !!
भूल ही जाते अपनी तबाही का सबब हम
ज़िन्दगी हाथ तेरे फिर जो न आना होता !!
ज़िक्र उसका हुआ चलो कोई बात नहीं
मुझे रोना था कुछ तो बहाना होता !!
ज़िन्दगी बनी है उसकी ही तिनके की मानिंद
जिसके शाने तक कई हाथों को आना होता !!
कर तो जाते हम तुम्हारी बज़्म को रौशन
चाहे हँस कर हमको भी जल जाना होता !!
पूछने आते हम तुम्हारी मौत का आलम
अपनी साँसो का गर कोई ठिकाना होता !!
आजिज़ करती है बहुत तेरे दामन की तलाश मुझे
जब भी कुछ ख़ुद से कुछ ज़माने से छुपाना होता !!
तुम भी कहते बड़े क़ाम का इंसान हूँ मैं
जो इस हाल में मुझे तुमने न जाना होता !!
यूँ न कर मेरे जीने की तू हर घड़ी दुआऐं
मैं न होता तो तेरे साथ ज़माना होता !!
गैर बन जाने में वख्त ही कहाँ लगता है ‘सबा’
बस एक कदम तमको और एक हमको हटाना होता !!
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