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Valentine Ghazals

Book By: Saba Hilal
Poetry


Book: Valentine Ghazals
Author: Saba Hilal
Published By
Fausta Research and Development Private Limited
101, Nalanda Apartments, 21-C, Faridabad, HR-121001.
Publisher’s Email: FaustaRC@gmail.com
Blog: thecompanyfausta.blogspot.com
Price: INR 130/-

वैलेंटाइन ग़ज़ल्स (Content)

तुझे पुकारा है 1
फिर मिले या न मिले 2
ताबीर-ए-ज़िन्दगी 3
मोहब्बत का सफ़र 4
जाँकनी 5
दौर-ए-सफ़र 6
होश आया क्या हुआ 7
तसववुर 8
बात बन जाये 9
दीवानगी 10
साथ जमाना होता 11
रास्ता कहाँ मिला 12
टूटा सितारा है 13
लकीरें 14
सौग़ात 15
वो क्यों है 16
मक़ाम 17
लाखों रंग 18
दुआओं की होली 19
वह कोई और था 20


Submitted:Jun 28, 2010    Reads: 215    Comments: 0    Likes: 0   


A Sample Ghazal from 'Valentine Ghazals' by Saba Hilal

साथ ज़माना होता

काश दस्तूर-ऐ-वफ़ा हमको न निभाना होता

छूट जाता कोई ग़म जो पुराना होता !!

भूल ही जाते अपनी तबाही का सबब हम

ज़िन्दगी हाथ तेरे फिर जो न आना होता !!

ज़िक्र उसका हुआ चलो कोई बात नहीं

मुझे रोना था कुछ तो बहाना होता !!

ज़िन्दगी बनी है उसकी ही तिनके की मानिंद

जिसके शाने तक कई हाथों को आना होता !!

कर तो जाते हम तुम्हारी बज़्म को रौशन

चाहे हँस कर हमको भी जल जाना होता !!

पूछने आते हम तुम्हारी मौत का आलम

अपनी साँसो का गर कोई ठिकाना होता !!

आजिज़ करती है बहुत तेरे दामन की तलाश मुझे

जब भी कुछ ख़ुद से कुछ ज़माने से छुपाना होता !!

तुम भी कहते बड़े क़ाम का इंसान हूँ मैं

जो इस हाल में मुझे तुमने न जाना होता !!

यूँ न कर मेरे जीने की तू हर घड़ी दुआऐं

मैं न होता तो तेरे साथ ज़माना होता !!

गैर बन जाने में वख्त ही कहाँ लगता है 'सबा'

बस एक कदम तमको और एक हमको हटाना होता !!






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