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soldha land sliding

Novel By: milap singh
Poetry


soldha land sliding poem by nilap singh bharmouri View table of contents...


Chapters:

1

Submitted:Oct 24, 2013    Reads: 2    Comments: 0    Likes: 0   


पिछले कल सोलधा में

लैंड स्लाइडिंग से

दस मकान पल में

जमीन में बिखर गये है

भूकम्प प्रभावित डेंजरस जोन है यह

बहुत पहले से

हमारे विज्ञान कह रहे है

पर मानता कौन है

कोई भी नही

लिखा रह जाता है

बस किताबों में कहीं

मत करो खिलबाड़

पर्यावरण से तुम

पर्यावरण विरोधी

गतिविधियाँ छोड़ दो

मत बनाओ पहाड़ों में हाइड्रो प्रोजेक्ट

लोगों को मौत के कुंए में धकेलना छोड़ दो

सोलधा तो शिवालिक श्रेणी में है

यहाँ राहत सामग्री

पहुँच सकती है

भरमौर तो उच्च हिमालय में है

यहाँ छोटी सी भी गलती लोगों को

एक विकट समस्या में उलझा सकती है

बहुत दुर्गम इलाका है यह

बहुत भंगुर है इसकी भू संरचना

तहस नहस हो जाएगा सब कुछ

छोड़ अभी भी प्रकृति से खेलना

................मिलाप सिंह भरमौरी

भगवान सोलधा लैंड स्लाइडिंग से प्रभावित लोगों के दुःख को कम करने मर उनकी सहायता करे





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