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yaad aayenge ye din

Poetry By: kanika sharma
Poetry


a short story of college life in the form of poetry


Submitted:Oct 12, 2012    Reads: 10    Comments: 0    Likes: 0   


नए नए हम आये थे
एक दूजे से अनजाने
खुलकर मिलने में भी
हम सब थे थोड़ा हिचकिचाते.....

नाम पूछते बतलाते थे
फिर थोडा सा मुस्कुराते थे
अपने इस कोमल मन से
अपने भाव जताते थे.....

सुबह-सुबह उठकर
लाइन जो लगाते है
बस से कॉलेज तक
सब संग में आते है ......

हर असाइनमेंट छाप-छाप कर
अपना ज्ञान बढाया है
और कुछ आया ना आया
नक़ल करना दोस्तों ने ज़रूर सिखाया है......

मतभेद कभी जो बढ़ गये

खुद ही सुलझाते है

एक दूजे से घुल मिलकर

माहौल को मस्त बनाते है.......

इग्‍जाम समय आने पर

खुद को रात भर जगाया है

समझ नहीं आने पर

'मुझे पढ़ा दे' का नारा भी लगाया है......

ये मौज मस्ती के पल

फिर ना कभी आयेंगे

तीन बरस जीवन के ये

सबसे सुखमय कहलाएँगे.....





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