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fir bhi tumse mohabt hai

Poetry By: milap singh
Poetry


Tags: Shayari, Of, Milap, Singh


love shayari of milap singh


Submitted:Dec 17, 2012    Reads: 3    Comments: 0    Likes: 0   


फिर भी तुमसे मोहबत है

फिर भी तुमसे मोहबत है

तोड़ दे दिल दिल मेरा इजाजत है

तुज्को मैने दिल से चाहा है

बस यही मेरी हकीकत है

बेबफा हो तुम तो भी क्या

मुझको को तो बफा की आदत है

महंगा पड़ जायेगा नजर मिलाना भी

कहने को तो फक्त शरार्त है

काम आएगा अब मयखाना ही

जहाँ रोज 'मिलाप' कयामत है

संभल के चल इश्क की राह पे

इसमें सपनों सी नजाकत है

मिलाप सिंह





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