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shail bade thiye (gaddi boli ki kavita)

By: milap singh

Page 1, milap singh bharmouri ne ye kavita gaddi boli me likhi hai. yeh kavita me bachpan ke dino ke bare me hai.

 

शैल बड़े थिए बचपना रे धियाड़े

हर मौके -मौज उडांदे थिए

इन्दे-गंदे स्कूला जो

सेओ ते चीर चुरांदे थिए

रंग -बरंगी कहानी री जेहने

हानी सोगी गप्पा पेंदे थिए

गांगी,बैलू ,कुक्नू ताऊ

फिरि बड़ा उजाडा क्रांदे थिए

अम्मा -बापू ,दादू -दादी

जेहने कोई कम बतांदे थिए

स्कूला रा कम करना लगुरे

बड़ा शैल बहाना बनांदे थिए

घरावाले हीता तोऊ बचाने तांऐ

थुल्ले-थुल्ले ओडन लोआँदे थिए

पर असे चोरी -चोरी मोटे तोऊ

बत्ता मंज स्केट च्लांदे थिए

 

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