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tanhaion ke pal

Poetry By: milap singh
Poetry



ye shayari milap singh dwara tanhai our pyar ke bare me likhi gai hai.


Submitted:Dec 3, 2012    Reads: 5    Comments: 0    Likes: 0   


तनहाईय़ौं के पल

बन के इक आस नई दिल पे छा जाते है

भूले बिसरे लम्हे जब याद आ जाते है

मुझको होती है तुमसे मिलने की खवाइश

जब तेरे प्यार के पल सपनों में आ जाते है

फिर से जीने की तमन्ना करता है दिल

जब तेरे हुस्न के जलबे झलक दिखा जाते है

फिर से मंजिल की तरफ बनता है रुख

फिर कई मकसद जहन में मेरे आ जाते है

प्यार जिन्दगी में बड़ा जरूरी है 'मिलाप'

वरन तनहाईय़ौं के पल जिन्दगी खा जाते है

milap singh





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