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ye ! jindgi mere khav tu

Poetry By: milap singh
Poetry


Tags: Shayari, Of, Milap, Singh


milap singh ki is shayari me jindgi ke bare me likha gya hai.


Submitted:Dec 19, 2012    Reads: 4    Comments: 0    Likes: 0   


ऐ ! जिन्दगी मेरे खाब तू यूँ फना न कर

बेवक्त दगा न दे मुझे तू गुनाह न कर


हर शय़ से आजतक मैने की है ईमानदारी

मै भी करूंगा बेबफाई तू गुमान न कर


लुत्फ़ उठाने दे जरा दुनिया की रंगीनियों का

कर न तकरार मुझसे खराब समां न कर


किससे की है तूने आजतक बफा बता

जज्बात दिल के मेरे फिर से जबां न कर


जरुर मिलेगी मंजिल 'अक्स ' जहाँ में कभी

उम्मीद बेशक धुंदली ही पर धुआं न कर



मिलाप सिंह





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