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Khuda Ke Liye - From the Upcoming Book - Valentine Ghazals - Series 2

Poetry By: Saba Hilal
Poetry


खुदा के लिये


Submitted:Apr 9, 2012    Reads: 6    Comments: 0    Likes: 0   


मुझे मालूम नहीं मोहब्बत का सलीक़ा क्या है !

तू मिल जाए मुझे उस इबादत का तरीक़ा क्या है !!

वो जो मछली के अंदर पूरा समन्दर भर दे

तेरी रहमत का वो बेशुमार ज़ख़ीरा क्या है !!

जो मेरी रूह को साफ करे रौशन कर दे

मेरे दिल के लिये वो पाक क़सीदा क्या है !!

तेरे ही वख़्त का जो मैं तुझको हिस्सा दे दूँ

सारी दुनिया का मुझे लेके यह फ़ज़ीता क्या है !!





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