Welcome Visitor: Login to the siteJoin the site

Bhavnayein - A Hindi Poem

Poetry By: Vikas Sharma
Poetry


Tags: Hindi, Poetry


Feelings ........ As I understand


Submitted:Jan 2, 2013    Reads: 111    Comments: 0    Likes: 1   


भावनाएँ

भावनाओं का अथाह सागर
डोलता मेरा मन गागर
कभी उस से प्रेम का भाव
कभी रूठने मनाने का चाव
कभी सच्चे प्यार की आस
कभी कामातुर प्रेम की प्यास
कभी नाराजगी का बोध
कभी बेवजह आता क्रोध
कभी लालच उसके संग का
कभी घायल होना मेरे अहं का
कभी दूरियों का दुःख
कभी नजदीकियों का सुख
कभी उसके ख्यालों में खोना
कभी याद करके उससे रोना
कभी उसे अपने सपनों में तलाशना
कभी यूँ ही उसकी याद में बेवजह मुस्कराना
यह सब क्या है
भावनाए ही तो है
जैसा रहा समय का घटनाक्रम
वैसी रही भावना उस दम
न वह बदली न मैं बदला
बदला तो सिर्फ भावनाओ का सिलसिला
मगर इन भावनाओ में हम बह निकले
और कर लिए एक दूसरे से शिकवे गिले
भावनाओं को अगर सिर्फ भावना समझते
तो यूँ न हम तुम ज़िन्दगी से उलझते .............





1

| Email this story Email this Poetry | Add to reading list



Reviews

About | News | Contact | Your Account | TheNextBigWriter | Self Publishing | Advertise

© 2013 TheNextBigWriter, LLC. All Rights Reserved. Terms under which this service is provided to you. Privacy Policy.