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Hume Ek Dhundh Se Aana Hai Ek Dhundh Me Jaana Hai

Article By: Munna
Song lyrics



संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है
एक धुँध से आना है एक धुँध में जाना है


Submitted:Feb 1, 2012    Reads: 18    Comments: 0    Likes: 0   


साहिर: मेरे पसंदीदा गीतकार

साहिर: मेरे पसंदीदा गीतकार

साहिर मेरे पसंदीदा गीतकार रहे है क्योकि उनके गीतों में कोरा आदर्शवाद नहीं था  और ना ही उनमे भटकाव भरी रूमानियत  थी .  भजन भी उनके कलम से निकलता था तो ऐसा लगता था कि  जिंदगी को ही सच मानने वाले ने परम सत्ता से कैसे सम्बन्ध बना लिया ? कहने का मतलब उनके अनुभव का दायरा विशाल था और इस बात को समझना लगभग नामुमकिन है कि कैसे वे विपरीत छोरो पर विचरण कर लेते थे एक वक्त में ही.

अब ये गीत ही देखिये.  भारतीय दर्शन की एक जबरदस्त झलक दिखती है इस गीत में.  एक  प्रोग्रेसिव शायर की कलम से निकला है ये दार्शनिक गीत.  है ना ये अजूबा!!   ये गीत मुझे बहुत रूहानी सुकून देता है.  सच में ये जीवन एक साबुन का बुलबुला है कब ये फूट जाए कोई नहीं कह सकता.  कब हम अनंत की यात्रा में निकल जाए इस माया को छोड़कर जिससे हम चिपके रहते है कोई कह नहीं सकता.   इसी अनंत की रहस्यमय यात्रा की तरफ इशारा करता है साहिर का ये गीत.  ये तो सब जानते  है कि इसी अनंत की यात्रा की कहानी है हमारा भारतीय दर्शन. 

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संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है 
एक धुँध से आना है एक धुँध में जाना है
 
ये राह कहाँ से है ये राह कहाँ तक है 
ये राज़ कोई राही समझा है न जाना है
 
एक पल की पलक पर है ठहरी हुई ये दुनिया
 एक पल के झपकने तक हर खेल सुहाना है 
 
क्या जाने कोई किस पल किस मोड़ पर क्या बीते
 इस राह में ऐ राही हर मोड़ बहाना है
  गीतकार: साहिर   संगीत: रवि  चलचित्र: धुंध (1973)



आडिओ संस्करण:  http://smashits.com/dhund/sansar-ki-har-shae/song-72665.html 

Pic credit: साहिर 





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